राजनीति में ऊपर जाने के लिए मुंह बंद गर्दन झुकी होना चाहिए

असलम अहमद

राजनीतिक ज्ञानी घीसालाल कहां करते थे। राजनीति मे ऊपर जाने के लिए मुंह बंद गर्दन झुकी होनी चाहिए, और अगर जनता की समस्या के लिए या अपनी समस्या के लिए जमीर अंदर से चुटी काटे, जज्बातों के समुंदर में लहरें उमड़ने लगे तो बाबा रामदेव की शरण में जाएं लोम विलोम करें मन शांत होगा।

वरना आपने राजनीतिक अहंकार बताया या यह सोचा की जनता की आवाज उठाने पर आका खुश होंगे शाबाशी देंगे तो जानिए, अधिकारी और ठेकेदार आपको पार्षद की टिकट भी नहीं मिलने देंगे। क्योंकि ऊपर से आए लोग नीचे वालों से नहीं डरते और फिर “सत्ता समोर शानपत्ति नाइ चालते” अति उत्साह में पंगा लेने वालों को पहले ही सोचना चाहिए था, कि भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगने के बाद भी चंद ही दिनों में जो अधिकारी मनचाहे स्थान पर पदस्थ हो सकता है।

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तो मतलब है कि हमारे आका और उसके चाचा दोनों एक है। और जब भी दोनों में से एक को चुनने की बारी आएगी हमारे आका चाचा को ही चुनेंगे। और फिर अपने अधिकारों के लिए लड़ना या जनता के अधिकारों के लिए लड़ना राजनीतिक सक्रियता हो सकती है। किंतु यह सक्रियता किसी में भय भी पैदा करती है। अधिकारों के लिए विरोध दर्ज कराना बगावत भी माना जा सकता है, और भविष्य के लिए सतर्क होकर उन्हें पहले पायदान पर ही रोकने के प्रयास प्रारंभ हो जाते हैं। ऐसे प्रयास में नगर के 3 से अधिक सक्रिय नेता बलिदान हो गए। इनका गुनाह यह था की जनता की आवाज बनने  निकले थे। अब ना खुदा मिला, ना  रिसाले सनम, इधर के रहे ना उधर के रहे।

व्यंग कलम मनोरंजन के लिए


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