ग्रहण के चलते कार्तिक पूर्णिमा पर ताप्ती तट पर नहीं उमड़ी भीड़,बंद रहे मंदिरों के भी कपाट

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मुलताई – कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु अनेक जिले एवं प्रदेश से ताप्ती स्नान के लिए ताप्ती तट पहुंचते हैं किंतु इस वर्ष ग्रहण के कारण ताप्ती तट पर स्नान करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या  कम ही रही।

ग्रहण के कारण सभी मंदिरों के कपाट बंद होने के कारण  स्थानीय एवं बाहर से आए श्रद्धालुओं ने ताप्ती मंदिर, शिव मंदिर जगदीश मंदिर, लक्ष्मी नारायण मंदिर, के द्वार पर ही भगवान एवं मां ताप्ती की पूजाकी।  मालूम हो कि प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा पर दूर-दूर से श्रद्धालु  ताप्ती तट पहुंचते हैं और ताप्ती स्नान कर मान्यता अनुसार असीम पुण्य की प्राप्ति करते हैं। कार्तिक पूर्णिमा के दिन ताप्ती स्नान को अत्यंत पुण्य कर्म माना जाता है यह माना जाता है कि आज के दिन ताप्ती सरोवर में स्नान करने से समस्त कष्टों का निवारण होता है यही कारण है कि कार्तिक पूर्णिमा पर बैतूल जिले के अलावा छिंदवाड़ा एवं बड़ी संख्या में महाराष्ट्र से श्रद्धालु ताप्ती स्नान के लिए मुलताई आते हैं ।

ताप्ती तट के  पंडितों ने बताया कि आज अनेक भक्त दो स्नान करेंगे सुबह 4 बजे से लोगों ने कार्तिक स्नान किया और अब शाम को जब ग्रहण समाप्त होगा तो लोग ग्रहण स्नान कर भगवान के दर्शन और पूजन करेंगे। प्रतिवर्ष के अनुसार इस वर्ष कार्तिक पूर्णिमा पर लोगों की भीड़ कम रही किंतु जैसे ही ग्रहण की समाप्ति होंगी लोग बड़ी संख्या में ताप्ती तट पहुंचकर तपती स्नान करेंगे।

स्नान के लिए किए हैं सुरक्षा के व्यापक इंतजाम

कार्तिक पूर्णिमा पर ताप्ती सरोवर पर सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। महिला घाटों पर कनाथ लगाई गई है । सरोवर में सुरक्षा रस्सी बांधी गई है। ताप्ती सरोवर में एमपीएसडीइआरएफ के जवानों को  तैनात किया गया है ताकि स्नान करने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षा प्रदान की जा सके। सरोवर के चारों ओर पुलिस कर्मी एवं महिला पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया है।

तैयारी पूर्ण किंतु नहीं प्रारंभ हुआ ताप्ती मेला

ताप्ती सरोवर के दुकानों के टेंट लगना प्रारंभ हो गया है किंतु इस वर्ष  भी मेला कार्तिक पूर्णिमा के दिन प्रारंभ नहीं हो सका। अभी झूले भी नहीं आए हैं इसलिए मेले की रौनक कुछ दिनों बाद ही दिखाई देगी। इस बार नगर पालिका ने प्रयास किया था कि कार्तिक पूर्णिमा से ताप्ती मेला प्रारंभ हो सके इसके लिए 8 दिन पूर्व से ही प्लाट आवंटन की प्रक्रिया पूर्ण कर दी गई थी किंतु पूर्व अनुभव के कारण व्यापारी और झूले के संचालक अपनी दुकानों की तैयारियां पूर्ण नहीं कर सके।


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