ताप्ती तट जहां तर्पण से मिलता है पितरों को मोक्ष,पंडित गणेश त्रिवेदी वर्षों से कराते है निशुल्क तर्पण

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गजाला अज़ुम,असलम अहमद

मुलताई :- पूरब से पश्चिम की ओर बहने वाली देश की सबसे लंबी नदियों में से एक ताप्ती नदी का अपना धार्मिक एवं पौराणिक महत्व रहा है । ताप्ती को आदि गंगा भी कहा जाता है ।

पुराणों में ताप्ती तट पर जप तप एवं पितरों के तर्पण का विशेष महत्व बताया गया है यही कारण है कि पितृपक्ष के महीने में दूर-दूर से लोग ताप्ती तट पर आकर अपने पितरों का तर्पण करते हैं और मान्यता अनुसार अपने पितरों को मोक्ष दिलाते है । पित्र पक्ष पर तर्पण के लिए ताप्ती तट पहुंचने वालों से पंडित गणेश त्रिवेदी वर्षों से निशुल्क तर्पण कराते हैं ।

निशुल्क तर्पण का प्रारंभ लगभग 35 वर्ष पूर्व पंडित दुर्गा शंकर त्रिवेदी ने किया था जिसके बाद उनके पुत्र गणेश त्रिवेदी यह विधि को आगे बढ़ा रहे हैं । ताप्ती की तरह ही प्राप्त जल में भी अनेक गुण पाए जाते हैं जो किसी अन्य नदियों में नहीं पाए जाते ताप्ती जल मे बाल और हड्डियां तक गल जाती है इसके वैज्ञानिक कारण हो सकते हैं किंतु लोग इसे ताप्ती की महिमा के रूप में देखते हैं । पंडित गणेश त्रिवेदी बताते हैं कि सूर्यपुत्री आदि गंगा मां ताप्ती तट पर तर्पण एवं पिंडदान का अपना धार्मिक महत्व है पुराणों में आता है कि ताप्ती तट पर अनेक ऋषि मुनि एवं देवी देवताओं ने भी अपने पितरों का तर्पण पिंडदान कर मोक्ष प्रदान कराया है । हम लगभग 35 वर्षों से ताप्ती तट पर निशुल्क तर्पण की विधि कराते हैं मुझसे पहले मेरे पिता पंडित दुर्गा शंकर त्रिवेदी ने यह परंपरा प्रारंभ की थी ।

पित्रपक्ष मास में ताप्ती तट पर देश के लिए शहीद होने वाले जवानों, मित्रों, शत्रु सहित पशु ,पक्षी, गाय आदि के लिए भी तर्पण करते हैं। ताकि पित्र तृप्त होकर मोक्ष प्राप्त कर सके और हमें सुख समृद्धि का आशीष दे । पंडित त्रिवेदी कहते हैं कि मां ताप्ती के इस पावन तट पर प्रतिवर्ष लगभग हजारों लाखों लोग यहां पहुंचते हैं भक्त लोग पहुंचकर अपने माता, पिता ,दादा परदादा सब का नियमित रूप से यहां पर तर्पण करते हैं और पुण्य लाभ अर्जित करते हैं। भक्तगण अपने माता-पिता और जितने भी पूर्वज जिनका देहांत हो गया है उनका ताप्ती जल से नियमित दर्पण कर मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करते हैं।


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