नगर के ऐतिहासिक रामलीला में हुआ अहिरावण वध,मकरध्वज से मिले हनुमान

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मुलताई- नगर नगर के ऐतिहासिक रामलीला में बीती रात अहिरावण वध  एवं मकरध्वज हनुमान युद्ध की लीला का सुंदर मंचन किया गया। जैसे-जैसे रामलीला अपने अंतिम चरण में पहुंच रही है लोगों का उत्साह भी बढ़ता जा रहा है

बीती रात बड़ी संख्या में लोग रामलीला मंचन को देखने गांधी चौक पहुंचे। मुलताई नगर की 118 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक राम लीला  नगर वासियों की आस्था का केंद्र है । रामलीला मंच को लेकर अनेक मान्यताएं हैं और यही कारण है कि धार्मिक अनुशासन का पालन करते हुए रामलीला का सुंदर मंचन देखने अनेक जिलों से भी लोग यहां आते हैं हाल ही में छिंदवाड़ा रामलीला से जुड़े लोग भी रामलीला मंचन देखने गांधी चौक पहुंचे थे।

रविवार को होगा भगवान राम का राज्याभिषेक रविवार को रामलीला मंच पर भगवान राम रावण वध के उपरांत अयोध्या लौटेंगे जहां उनका राज्य अभिषेक होगा जिसके बाद रामलीला के समापन की घोषणा की जाएगी

बीती रात रामलीला मंच पर अहिरावण ,राम लक्ष्मण को बंधक बनाकर पाताल लोक ले गया राम लक्ष्मण को मुक्त कराने राम भक्त हनुमान पाताल लोक पहुंचे जहां उनकी भेंट पाताल लोक रक्षक के रूप में उन्हीं का प्रतिरूप मकरध्वज से हुई मकरध्वज एवं हनुमान मे भीषण युद्ध हुआ जिसके बाद हनुमान को पता चला कि मकरध्वज उन्हीं का पुत्र है। हनुमान ने अहिरावण का वध कर पाताल लोक का राज्य मकरध्वज को सौप राम लक्ष्मण को लेकर वापस लौटे, राम का पाठ आदिश्वर शर्मा और लक्ष्मण का पाठ विक्की कडुकार , बजरंगबली का पाठ  पुरान्तक शर्मा ने किया और मकरध्वज का पाठ श्याम सोनी ने किया। नारायण तक की भूमिका के लिए मनीष लखेरा एवं काली की भूमिका के लिए शेषु साहू को सभी ने सराहा।

शनिवार रात आकर्षक लीला,रावण, नारायण तक युद्ध और वध

नगर के ऐतिहासिक रामलीला मंच पर शनिवार रात को रावण एवं नारायण तक वध की लीला का मंचन होगा। मुलताई लीला का समापन रावण वध एवं राम अभिषेक के साथ होता है। संपूर्ण रामलीला में रावण का पात्र आकर्षण का केंद्र होता है लीला में रावण की एंट्री के उपरांत ही श्रोताओं की भी जिज्ञासा भी बढ़ती है। पहले रावण का  पाठ यशवंत बेलदार जिन्हें रावण काका के नाम से जाना जाता था करते थे, उसके स्वर्गवास के बाद इस कमी को  शिवा खंडेलवाल ने ना सिर्फपूरा किया बल्कि नई ऊर्जा भी दी । 10 दस सीर का भारी मुकुट सर पर रखकर अभिनय करना आसान नहीं होता ।हालांकि यशवंत बेलदार की कमी को  पूरा नहीं किया जा सकता किंतु शिवा खंडेलवाल रावण के रूप में रामलीला मंच के आकर्षण का केंद्र है।

संस्कारों की पाठशाला है नगर की रामलीला

नगर में प्रतिवर्ष दशहरे से प्रारंभ होने वाली  ऐतिहासिक रामलीला, लीला के साथ ही संस्कारों की पाठशाला भी है। जिसकी एक विशेषता यह भी है कि इस लीला मे पाठ करने वाले पात्र सभी स्थानीय होते हैं । रामलीला  आरंभ के पूर्व मुकुट पूजन होता है फिर हनुमानजी का ध्वज चढ़ाकर रामलीला का आवाहन किया जाता है इसके उपरांत लीला के मंचन की तैयारियां प्रारंभ होती है पात्रों की का प्रशिक्षण शुरू होता है जिसमें छोटे छोटे बच्चे भी अनेक पाठ निभाते है और इस प्रशिक्षण में राम के अनेक पात्रों और धार्मिक शिक्षा को ग्रहण करते हैं जो संस्कारों के रूप में हमेशा उनके साथ रहता है


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