पैर कटा सपना नहीं आईएएस बनना चाहती है प्रज्ञा,झोलाछाप के इलाज के चलते कटा था एक पैर

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मुलताई- जब झोलाछाप डॉक्टर के गलत इलाज के कारण हिवरा निवासी प्रज्ञा पवार का पैर काटना पड़ा था प्रज्ञा 5 वर्ष की कक्षा पहली की छात्रा थी। उस वक्त प्रज्ञा का प्रकरण संपूर्ण जिले की सुर्खी बना था।

गरीब किसान की बेटी जब अपने जीवन से संघर्ष कर रही थी तब कुछ लोग मदद के लिए आगे आए और प्रज्ञा का ऑपरेशन हो करके पैर काटा गया, पैर कट जाने के बाद भी प्रज्ञा के भविष्य को लेकर अनेक संकाए थी किंतु आज पूरे 8 वर्ष गुजर गए हैं और प्रज्ञा कैलाश बोबडे़ जवाहर नवोदय विद्यालय प्रभात पट्टन की कक्षा आठवीं की छात्रा है और 13 वर्ष की हो चुकी है। नवोदय विद्यालय में प्रज्ञा का कक्षा छठवीं से दाखिला हुआ वह 2 वर्षों से इस विद्यालय में है और आईएएस बनना चाहती है।

प्रज्ञा को पहले कृत्रिम पैर लगाया गया था जिसके सहारे वो चलती थी किंतु उम्र के साथ कृत्रिम पैर छोटा पड़ गया और आज वह वैशाखी से चलती है। उल्लेखनीय यह है कि 8 वर्ष गुजर जाने के बाद भी वह अपने सहयोग करने वाले सभी लोगों को जानती है। हमने प्रज्ञा से नवोदय विद्यालय में जाकर बात की 8 साल बाद भी प्रज्ञा हम को देखकर पहचान गई । उसके चेहरे पर वही मासूमियत अब भी है जो 8 साल पहले थी किंतु अब प्रज्ञा आत्मविश्वास से भरी दिखाई देती है और कुछ करने का जज्बा उसके चेहरे पर झलकता है।

याद है जिन लोगों ने हमारी मदद की थी

प्रज्ञा की माता उषा बोबड़े बताती है कि प्रज्ञा सहित हमारा पूरा परिवार उन सभी लोगों को याद करता है जिन लोगों ने हमारी मदद की थी। विशेष तौर से तत्कालीन ब्लॉक स्वास्थ्य अधिकारी रजनीश शर्मा जिन्होंने इंदौर के हॉस्पिटल में न सिर्फ ऑपरेशन कराया बल्कि मुलताई से एंबुलेंस के माध्यम से इंदौर हॉस्पिटल तक प्रज्ञा को पहुंचाने की व्यवस्था भी की।

यहां उल्लेखनीय है कि रजनीश शर्मा के मुलताई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ रहते हुए लगभग 140 प्रकरण मुख्यमंत्री सहायता के बने थे जो अपने आप में रिकॉर्ड जिसमें अनेक गंभीर मरीजों के उपचार किए गए थे जो आज भी रजनीश शर्मा को याद करते हैं। इसके अलावा पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष समीर खान एवं नगर की अशासकीय शालाओं जिसमें न्यू कार्मेल कन्वेंट स्कूल के संचालक अनीश नायर प्रमुख है।

बढ़ते जा रहे हैं ऐसे मामले

गलत इलाज के आरोप चलते प्रज्ञा को अपना पैर खोना पड़ा था और इस प्रकरण के बाद यह माना जा रहा था कि अब ऐसी घटना दोबारा शायद ना हो क्योंकि तब थाने में एफ आई आर भी हुई थी और मामला न्यायालय में भी पहुंचा था किंतु यह सिलसिला अब भी थमा नहीं है ऐसे मामले हाल ही में फिर सामने आए हैं । किंतु f.i.r. तो छोड़ो प्रशासन गंभीर है यह भी दिखाई नहीं देता ऐसे मामलों में ठोस कार्रवाई करनी होगी क्योंकि यह मामले बढ़ते जा रहे हैं।


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