मां ताप्ती की तरह बने बैतूल की बेटियां, न झुकने दें पिता का सिर : पं. प्रदीप मिश्रा

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संजय द्विवेदी, असलम अहमद

बैतूल- मेरा बैतूल की बेटियों से एक ही आग्रह है कि वे मां ताप्ती की तरह बने और कभी अपने पिता का सिर न झुकने दें। राजा सवर्ण से विवाह का प्रस्ताव मिलने पर मां ताप्ती ने कहा था कि यदि मेरे पिता चाहेंगे तो उनकी अनुमति से ही मैं आपसे विवाह करूंगी।

उसी तरह आप भी बिना किसी के छलावे और बहकावे में आए केवल और केवल अपने पिता की मर्जी से ही विवाह करें। बैतूल के शिवधाम कोसमी में चल रही मां ताप्ती शिवपुराण कथा के चौथे दिन यह आह्वान विश्व विख्यात कथा वाचक पं. प्रदीप मिश्रा ने किया। मां ताप्ती शिवपुराण समिति के तत्वावधान में चल रही इस कथा में रात को भारी बारिश होने और कथा स्थल पर कीचड़ होने के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।धर्मांतरण पर बेटियों को किया सचेत पं. मिश्रा ने बेटियों से कहा कि वे मां ताप्ती जैसा तप स्वयं में रखें और खुद किसी के धर्म में जाने के बजाय किसी के द्वारा ऐसी कोशिश करने पर उसे अपने धर्म में लाने की ताकत रखें।

मां ताप्ती ने भी स्वयं कोई परीक्षा नहीं दी और न तप किया बल्कि राजा सवर्ण को उन्हें पाने के लिए तप करना पड़ा, परीक्षा देनी पड़ी। उन्होंने आगे कहा कि अपने घर में रूखी-सूखी जैसी भी रोटी मिले, उसे खाकर गुजारा करो पर दूसरों के घर जाकर उनकी जूठन मत खाओं। दूसरे धर्म में आने के लिए पहले खूब प्रलोभन मिलेंगे, कुछ दिन खूब खातिरदारी होगी, लेकिन फिर कोई नहीं पूछेगा। इसलिए बेटियां इसे लेकर खास तौर से सचेत रहे।

हर व्यक्ति की आंखों में आ गए आंसू

पं. मिश्रा ने आज बेटी और पिता को लेकर एक बेहद भावुक प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि बेटी जिस दिन से जन्म लेती है, उसी दिन से पिता उसके विवाह के लिए जोडऩा शुरू कर देते हैं। हैसियत न होने के बावजूद बेटी की हर इच्छा पूरी करते हैं। बेटी का कन्यादान उनकी सबसे बड़ी तमन्ना होती है। बेटी का जब विवाह होता है तो वे उसके सामने तक नहीं आ पाते और यहां-वहां छिप कर रोते रहते हैं। ऐसे में यदि बेटी उनकी मर्जी के बगैर अपनी मनमर्जी से विवाह कर लें तो उन्हें कितना दुख होगा, वे किसी को मुंह दिखाने के काबिल नहीं रह जाते हैं।

पिता के रहते राजकुमारी रहती है बेटियां

पिता के रहते तक बेटी दुनिया की सबसे खुशनसीब राजकुमारी रहती है। पिता दुनिया की सबसे बड़ी दौलत होते हैं। इसलिए हमेशा उनका सम्मान करें। इस प्रसंग के दौरान न केवल बेटियां बल्कि महिलाएं और पुरूष श्रद्धालुओं तक की आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने यह सलाह भी दी कि हर दिन बाहर से आने पर बेटा हो या बेटी, अपने पिता के पास कुछ समय जरुर बैठे और अपने मन की बात उनसे करें।कथा की समाप्ति पर गुरुवार को भगवान महादेव और पार्वती जी के साथ भगवान श्री गणेश की आकर्षक झांकी प्रस्तुत की गई। इसके बाद विधायक भैंसदेही धरमूसिंह सिरसाम, चिंतक-विचारक मोहन नागर, आठनेर जनपद पंचायत अध्यक्ष रोशनी इवने, पूर्व विधायक शिवप्रसाद राठौर, धर्मेंद्र मालवीय, पप्पू शिवहरे, साधना स्थापक, अतीत पंवार द्वारा चौथे दिन की आरती की गई।


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