मोरखा प्रसिद्ध धन गौरी बाबा मंदिर का होगा जीर्णोद्धार,महाराष्ट्र शिवसेना सांसद ने दिए 50 लाख

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असलम अहमद

मुलताई- बैतूल और छिंदवाड़ा सीमा पर ग्राम मोरखा के पास बेल नदी के तट पर स्थित प्रसिद्ध नागदेव मंदिर धन गौरी बाबा परिसर का 50 लाख रुपए की लागत से कायाकल्प होने जा रहा है। जिसका भूमि पूजन महाराष्ट्र नागपुर रामटेक से शिवसेना सांसद कृपाल बालाजी तुमाने ने किया।

महाराष्ट्र सांसद तुमाने ने मंदिर जीर्णोद्धार एवं सौंदर्य करण के लिए   25 लाख रुपए एवं सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 25 लाख रुपए दीए।भूमि पूजन के अवसर पर सांसद ने कहा कि मंदिर निर्माण में पैसे की कमी नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने कहां की वह बचपन से अपने माता पिता के साथ इस मंदिर से जुड़े रहे हैं हमारे परिवार का हर शुभ कार्य धन गौरी बाबा के आशीर्वाद से प्रारंभ होता है। महाराष्ट्र से बड़ी संख्या में लोग इस मंदिर से आस्था से जुड़े हुए हैं।

मंदिर समिति सचिव राजू यदुवंशी ने बताया कि निर्माण कार्य के लिए आरईएस विभाग जुन्नारदेव को एजेंसी बनाया गया है। धन गौरी बाबा मंदिर निर्माण में सहयोग प्रदान करने के लिए सांसद कृपाल बालाजी तुमाने का मंदिर समिति न्यास श्री नागदेव मंदिर धर्मार्थ सेवा समिति  लिंबोटी जिन्नारदेव छिंदवाड़ा अध्यक्ष अधिवक्ता गिरधर यादव एवं समिति सदस्यों ने स्वागत किया और इस पुनीत कार्य में सहयोग प्रदान करने के लिए उनका आभार व्यक्त किया। नव निर्माण भूमि पूजन से पूर्व  धनगौरी बाबा समिति से जुड़े लोगों एवं सांसद ने नागदेव मंदिर में पूजा अर्चना की इसके उपरांत ग्राम के बुजुर्गों से नव निर्माण का भूमि पूजन कराया गया।

भूमि पूजन के अवसर पर न्यास श्री नागदेव मंदिर धर्मार्थ सेवा समिति  निबोटी के उपाध्यक्ष हरीराम यदुवंशी, पदेन सदस्य कांग्रेस विधायक सुनील उइके, पदेन सदस्य रेखा देशमुख ,कोषाध्यक्ष दिनेश पाल, राजू यदुवंशी सचिव, राजेंद्र यदुवंशी, साधु पटेल संरक्षक, तरुण जैन अधिवक्ता ,रामनाथ यदुवंशी, योगेश धुर्वे, निलेश यदुवंशी ,कैलाश, रितुराम महबूब, शिवजी यदुवंशी प्रकाश धुर्वे, सेवाराम यूवनाती उपस्थित थे।

मध्य प्रदेश महाराष्ट्र से लाखों की संख्या में आते हैं श्रद्धालु

बेल नदी के तट पर स्थित प्रसिद्ध नागदेव मंदिर जिसे धन गौरी मंदिर कहा जाता है यहां प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में श्रद्धालु  अपनी श्रद्धा सुमन चडाने आते हैं। विशेष तौर से महाराष्ट्र से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बहुत अधिक होती है। यहां ऋषि पंचमी एवं नागपंचमी पर विशाल मेले का आयोजन होता है जहां दूर-दूर से लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और अपने मनौती के धागे बांधते हैं। विशेष तौर से विवाह के उपरांत पति-पत्नी यहां धन गौरी बाबा का आशीर्वाद लेने परिवार के साथ पहुंचते हैं । कहा जाता है कि यहां सर्प दोष की पूजा होती है जिससे सर्प दोष समाप्त हो जाता है। यहां बेल नदी के तट पर डोमन शेष एवं मोतन शेष नाग देवता के मंदिर है जिनकी परिक्रमा की जाती है। यहां वर्ष में अलग-अलग समय में मेले आयोजित होते हैं जेठ पूर्णिमा से 5 मई से सावन तक सप्ताह में 4 दिन मेले लगते हैं। इसके बाद सावन से प्रतिदिन यहां मेलों का आयोजन होता है।

बैतूल जिले को मिलता है धन गौरी यात्राओं का सबसे ज्यादा  लाभ

बैतूल एवं छिंदवाड़ा की सीमा पर स्थित धन गौरी नागदेव मंदिर की यात्राओं का सबसे ज्यादा व्यवसायिक लाभ बैतूल जिले को मिलता है क्योंकि मंदिर की मुलताई नगर से  दूरी 35 किलोमीटर की है महाराष्ट्र से आने वाली अधिकांश यात्री मुलताई से होकर धन गौरीधाम निबोटी पहुंचते हैं। किंतु इतना महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल होने के बावजूद भी यहां श्रद्धालुओं के लिए उचित व्यवस्था नहीं है । और ना ही किसी ने इस विषय में सोचा हालांकि हमारे जिले में भी धार्मिक और संवेदनशील जनप्रतिनिधियों की कमी नहीं है किंतु महाराष्ट्र के शिवसेना सांसद ने दिखने और होने के अंतर को स्पष्ट किया है। हो सकता है आगामी समय में दूसरे जनप्रतिनिधियों को भी इससे प्रेरणा मिले।

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