राम का संदेश लेकर अंगद पहुंचे रावण दरबार,रामलीला मंच पर अंगद शिष्टाई लीला का मंचन

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मुलताई – गांधी चौक पर आयोजित होने वाली नगर की धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर रामलीला में बीती रात अंगद शिष्टाई की लीला का मंचन किया गया।

जब बाली पुत्र अंगद भगवान राम से आज्ञा लेकर रावण के दरबार में पहुंचे तो युवराज अंगद ने महाराज रावण को सीता को सम्मान नित रूप से राम को लौटा कर भगवान राम की शरण में जाने का कहा जिस पर हंकारी रावण अंगद को बाली वध का स्मरण कराता है जिस पर युवराज अंगद रावण से कहते हैं कि  हां मैं उसी वीर बाली का पुत्र हूं जिसने तुम्हें काग में दबा कर रखा था। और तुम चाहो तो मेरे बल की परीक्षा ले सकते हो लंका नगरी में ऐसा कोई वीर नहीं है जो मेरे पग को भी किंचित मात्र भी डिगा सके और राजदरबार में उपस्थित मेघनाद सहित तमाम योद्धाओं की लाख कोशिशों के बावजूद अंगद के पैर को हिला नहीं पाता।

रावण के रूप में शिवा खंडेलवाल एवं अंगद के रूप में सुमित शिवहरे ने अपने अभिनय कौशल से दृश्य को जीवंत बनाया जिसे सभी ने सराहा। मुलताई रामलीला की एक विशेषता यह भी है कि इसके अनेक पात्र परंपरागत रूप से पीढ़ियों से लीला में अपनी भूमिका निभा रहे हैं । अंगद का पात्र इसके पूर्व सुमित शिवहरे के पिता स्वर्गीय राजीव भैया निभाते थे उनके बाद यह पात्र सुमित शिवहरे निभा रहे हैं ऐसे ही लीला के अनेक पात्र है जो तीन तीन पीढ़ियों से रामलीला में अपनी भागीदारी निभा रहे हैं।

118 वर्षों से निरंतर हो रही है रामलीला

गांधी चौक पर आयोजित होने वाली रामलीला गुजरे हुए वक्त और इतिहास का दस्तावेज है नगर में 118 वर्षों से निरंतर हो रही रामलीला का अपना धार्मिक और पौराणिक महत्व रहा है। इस रामलीला की विशेषता यह है कि जहां संपूर्ण देश में दशहरे पर रावण दहन के साथ रामलीला समाप्त होती है यह दशहरे से प्रारंभ होती है यह रामलीला  दूसरी लीलाओं से अलग इसलिए भी है क्योंकि इसके पात्र सभी स्थानीय होते हैं। और इसके पात्र भी लीला समय अवधि में पूरे धार्मिक नियमों का पालन करते हैं रामलीला को जागृत रामलीला माना जाता है और यही कारण है कि इनके पात्रों में भगवान के स्वरूप को देखा जाता है।
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