सुख सौभाग्य के लिए घर,घर मे हो रहा हल्दी कुम कुम कार्यक्रम,महिलाएं कविता में लेती है पति का नाम

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मुलताई -परिवार की सुख समृद्धि एवं महिलाओं के सुख सौभाग्य के लिए मकर सक्रांति से प्रारंभ होने वाला हल्दी कुमकुम कार्यक्रम प्रारंभ हो गए हैं महिलाओं द्वारा घर-घर में हल्दी कुमकुम कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।

यह कार्यक्रम महिलाओं द्वारा अपने अपने मोहल्ले और घरों में आयोजित किए जाते हैं वैसे गायत्री परिवार सामूहिक रूप से भी हल्दी कुमकुम कार्यक्रम  आयोजित करता है इसके साथ ही धोबी समाज संगठन भी हल्दी कुमकुम कार्यक्रम ताप्ती तट पर आयोजित करता है।हल्दी कुमकुम कार्यक्रम के संबंध में देशमुख पेंटर बताते हैं कि पूर्व में यह आयोजन महाराष्ट्रीयन समाज में ही होते थे किंतु अब  सभी  समाज में  हल्दी कुम कुम का आयोजन किया जाने लगा लगा है, यह आयोजन मकर संक्रांति के बाद से रथ सप्तमी (अचला सप्तमी )तक ही किया जाता है ।

इस हल्दी कुम कुम के कार्यक्रम में  सुहागन  सभी महिलाओं को अपने घर पर आमंत्रित करती है तत्पश्चात सुहागन महिलाएं एक दूसरे को हल्दी कुम कुम लगाकर वान के रूप में कुछ,फल, मूंगफली अनाज,एवम सुहाग की सामग्री भेट की जाती है ,नगर की  सुनीता देशमुख,निर्मला साबले,ऋतु डोंगरे,पुष्पा कनाठे,शालू कुबड़े ,ममता धोटे,जमुना घोड़की मेडम,सुनीता साबले आदि ने बताया की महिलाएं एक दूसरे से उखाने पूछती हैं जिसमे कविता या शायरी के माध्यम से उनके पति का नाम पूछा,बताया जाता है ,और जब तक नाम नही बताती तब तक वान देते समय एक दूसरे का हाथ पकड़कर रखा जाता है ,वैसे हमारी भारतीय  संस्कृति और परंपरा के अनुसार कोई भी पत्नी सीधे तौर पर अपने पति का नाम नहीं लेती है लेकिन इस हल्दी कुम कुम कार्यक्रम में परंपरा के अनुसार उखानों (दो लाइन की कविता,या शायरी )के द्वारा अपने पति का नाम पूछा, बताया जाता हैं।,यह कार्यक्रम कुनबी समाज, पवार समाज ,सोनी समाज,साहू समाज एवम अन्य सभी समाजों  में   सामूहिक आयोजन के रूप में मनाया जाता है। उखाणे,,,जैसे किसी के पति का नाम,,नारायण है,,तो उसे इस रामायण में राम गीता में श्याम नारायण जी के चरणों में चारो प्रकार उखानें के द्वारा बताया जाता हैं।

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