OMG 4 लाख 60 हजार मे खरीदा गया था काउ कैचर, विधानसभा में दी जानकारी

0
359

मुलताई- नगर पालिका में खरीदी को लेकर बीते 1 वर्षों से शिकवा शिकायतों का दौर जारी है किंतु इस मामले में अब तक कोई कार्यवाही नहीं हो सकी है और ना ही नगरपालिका ने मांगी गई जानकारी नेता और नागरिकों को उपलब्ध कराई

किंतु अब जब विधानसभा प्रश्नों के जवाब में नगर पालिका ने विधानसभा में जानकारी दी है तो अनेक चौंकाने वाले तथ्य उजागर हो रहे हैं, जिसे विश्वास करना कठिन हो रहा है। विधानसभा प्रश्न और उत्तर संबंधित दस्तावेज पत्रकारों को नगर पालिका अध्यक्ष नीतू प्रह्लाद परमार, एवं नगरपालिका सभापति एवं पार्षदों ने उपलब्ध कराई जिसके अनुसार विधायक सुखदेव पांसे ने विधानसभा में मुलताई नगर पालिका में खरीदे गए काऊ केचर संबंध में जानकारी मांगे जाने पर बड़ा खुलासा हुआ है। जिसकी शिकायत पूर्व मंत्री एवं विधायक पांसे पत्र क्रमांक 1399 के माध्यम से प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग भोपाल से की है।

विधायक द्वारा काऊ केचर खरीदी में वित्तीय अनियमितता के संबंध में की गई इस शिकायत में बताया गया है कि जेम पोर्टल के माध्यम से काऊ केचर 4 लाख 60 हजार रुपए में खरीदा जाना बताया गया है। इसमें गंभीर मामला यह है कि उक्त खरीदी में उपयंत्री से तकनीकी स्वीकृति प्राप्त किए बिना ही सप्लायर को आदेश जारी किया गया और भुगतान भी बगैर उपयंत्री के तकनीकी सत्यापन के  किया गया। विधायक ने शिकायत में कहा है कि गुणवत्ताहिन काउ केचर महंगे दाम पर क्रय किया जाकर गंभीर वित्तीय अनियमितता की गई है जिसमे नियमों की अनदेखी भी की गई है। काऊ केचर का भुगतान भी 15 वित्त आयोग से किया गया है जो की नगरीय निकाय को जारी अनुदान उपयोग के दिशा निर्देश का उल्लंघन है। यहां उल्लेखनीय है कि काउ केचर की उपयोगिता को लेकर पहले ही सवाल उठते रहे हैं।

हम तो डूबेंगे किस-किस को साथ लेकर …?

विधायक को विधानसभा मे मिली जानकारी मे जिस प्रकार चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए है वह एक गंभीर मामला है। चाहे वह 18 दिवस में 10 लाख के डीजल खरीदने का मामला हो। या बगैर निविदा आमंत्रित किए दो तिथियों में 4789 का बैनर के भुगतान का मामला हो । 10 हजार किलो ब्लीचिंग पाउडर क्रय की बात हो। अगर इसकी विधिवत जांच होती है। और की गई शिकायत सत्य पाई जाती है तो विभागीय प्रक्रिया के जानने वाले बताते हैं कि इसमें नगरपालिका के अनेक कर्मचारियों पर गाज गिर सकती है। क्योंकि यह नगरपालिका के अलग-अलग विभाग से संबंधित मामला है और किसी भी विभाग में खरीदी और भुगतान की अपनी प्रक्रिया है जिसमें खरीदी गई सामग्री का स्टोर कीपर और इंजीनियर  या संबंधित विभाग के जानकार द्वारा सत्यापन किया जाता है। इसके बाद अब तक की गई प्रक्रिया संबंधित दस्तावेज और बिल संबंधित अधिकारी से हस्ताक्षर कर प्रमाणित किए जाते हैं । इसके बाद अकाउंट सेक्शन में समस्त दस्तावेजों की जांच के बाद बिल ऑडिटर के पास भेजा जाता है जिसे ऑडिटर वेरीफाई करके भुगतान का आदेश देता है तो क्या यह माना जा सकता है कि अगर कहीं नियम की अनदेखी हो रही थी तो संबंधित बाबू ,ऑडिटर , लेखा शाखा  किसी को भी इसकी जानकारी नहीं थी।


LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here